मेरी इस दौरान कई लोगो से बात हुई और मैने जाना की वो कैसेे अपनी लाइफ को मैनेज करती है इस भागदौड भरी जिंदगी में। वही कुछ खास मंत्र आपके साथ बाटना चाहती हूं।
हम में से कुछ लोग इस भाग दौड़ को मैनेज करने में कामयाब हुए हैं, कुछ अभी भी काफी संघर्ष कर रहेे है। हम चाहते है आपकी एनर्जी भी बचे और आपके चेहरे पर मुस्कान आये।
1-स्मार्ट वर्क करो, हार्ड वर्क नहीं
आज मेरी मुलाकात हुई शिल्पा पाटनी से इनको शुरुआत में अपनी आईटी जॉब, छोटे बेबी और ससुराल वालों को संभालना मुश्किल लग रहा था। घर से काम करना उतना आसान नहीं था, जितना लगता था। लेकिन एक महीने बाद, उसे अहसास हुआ कि घंटों काम करने से बेहतर है कि आप स्ट्रैटेजी बनाकर काम करो और बेहतर रिजल्ट पाओ।
उन्होंने कहा "मैं अपने सबसे ज़रूरी काम पहली प्राथमिकता देती हूँ। जो भी काम मुझे करने हैं, वो सब मैं लिख देती हूँ और फिर हर हफ्ते के शुअरुआत मैं एक प्लान बनाती हूँ।" एक डायरी इस्तेमाल करने से वो अपने दिन को व्यवस्थित रखती हैं और इससे उन्हें अपने टारगेट पूरा करने में भी मदद मिलती है।
2-टीम मेंबर्स में बांटें काम
2-टीम मेंबर्स में बांटें काम
आप हर समय चाहते होंगे कि अपने काम को परफेक्शन के साथ पूरा करें, लेकिन याद रहे कि आप भले ही ऑफिस नहीं जाते लेकिन आप अब भी टीम के सदस्य हैं।
इसी प्रकार मेरी कॉलोनी मे रहने वाले आर्किटेक्ट सुनील पाई अपने प्लान और प्रोजेक्ट को बेस्ट बनाने के लिए ऐसा ही करते हैं। वो कहते हैं, "टीम को काम बांटना आना चाहिए।
अगर आप एक टीम के सदस्य हो, तो अपनी टीम के सदस्यों में टास्क बांटें, जो लोग कुछ कामों में एक्सपर्ट हैं वो आपको बेहतर प्रोडक्टिविटी देने में मदद कर सकते हैं।"
इसी प्रकार मेरी कॉलोनी मे रहने वाले आर्किटेक्ट सुनील पाई अपने प्लान और प्रोजेक्ट को बेस्ट बनाने के लिए ऐसा ही करते हैं। वो कहते हैं, "टीम को काम बांटना आना चाहिए।
अगर आप एक टीम के सदस्य हो, तो अपनी टीम के सदस्यों में टास्क बांटें, जो लोग कुछ कामों में एक्सपर्ट हैं वो आपको बेहतर प्रोडक्टिविटी देने में मदद कर सकते हैं।"
3-सेवाएं जो आपकी जरूरतों को समझें
बढ़ते वर्कलोड से जैसे हम डील कर रहे हैं, इसमें समय एक बड़ी भूमिका में है। न घर के सामानों खरीदारी के लिए ज्यादा टाइम होता है और न घंटों बैंक की लाइन में लगने के लिए और साथ ही ऑफिस का काम भी अपनी ओर बुला रहा होता है।
बढ़ते वर्कलोड से जैसे हम डील कर रहे हैं, इसमें समय एक बड़ी भूमिका में है। न घर के सामानों खरीदारी के लिए ज्यादा टाइम होता है और न घंटों बैंक की लाइन में लगने के लिए और साथ ही ऑफिस का काम भी अपनी ओर बुला रहा होता है।

मेरी मुलाकात शहनाज़ मिस्त्री से हुई इनका कहना है, कि Amazon's Prime सेवा के चलते उनके राशन का सामान एक ही दिन में घर आ जाता है, जिससे उन्हें अपनी स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर की जॉब से भी समय नहीं निकालना पड़ता।
कविता बताती हैं कि उनके पास अक्सर तीन प्रोजेक्ट पड़े रहते हैं, जब वो हर सुबह लोग इन करती हैं। तीनों को साथ में पूरा करने में वो अपने बाल खींचने लगती थीं। लेकिन अब उन्हें एक बेहतर तरीका मिल गया है। अब वो अपने काम के लिए डेडलाइन को बढ़ा देने की बात कर लेती हैं और ऐसे में उनका काम भी बेहतर होता है। उन्हें डेडलाइन की झंझट नहीं होती।
दूसरी तरफ उद्यमी हरीश वालिआ अपना टाइम, एनर्जी और अपनी मेहनत दोनों को बचाते हैं वो भी Airtel Platinum पर साइन इन करके, जो उन्हें देता है तेज़ 4G स्पीड।
प्लैटिनम ग्राहक होने के नाते, उन्हें रेड कार्पेट कस्टमर केयर मिलती है, साथ में सभी कॉल सेंटर्स और रिटेल स्टोर्स पर तरजीही सेवा मिलती है। जिससे उनका समय भी बचता है और प्रोडक्टिविटी भी बेहतर होती है। इसमें कोई दोराहे नहीं कि प्लैटिनम ग्राहकों को कंपनी प्राथमिकता देती है, उनका वेटिंग टाइम भी लंबा नहीं होता और हरीश जैसे कई लोगों का वर्कलोड स्ट्रेस भी कम होता है।
प्लैटिनम ग्राहक होने के नाते, उन्हें रेड कार्पेट कस्टमर केयर मिलती है, साथ में सभी कॉल सेंटर्स और रिटेल स्टोर्स पर तरजीही सेवा मिलती है। जिससे उनका समय भी बचता है और प्रोडक्टिविटी भी बेहतर होती है। इसमें कोई दोराहे नहीं कि प्लैटिनम ग्राहकों को कंपनी प्राथमिकता देती है, उनका वेटिंग टाइम भी लंबा नहीं होता और हरीश जैसे कई लोगों का वर्कलोड स्ट्रेस भी कम होता है।
4-बेहतर प्रोडक्टिविटी के लिए आउटसोर्स करें

सुमन कुलकर्णी को एहसास हो गया था कि अपने प्राइमरी स्कूल के बच्चों को रोज़ 6 घंटे तक पढ़ाने, ऑनलाइन असाइनमेंट चेक करने और फिर घर का खाना और बाकि कामकाजों में उसकी बहुत मेहनत जा रही थी। अब, वो बहुत ही प्रैक्टिकल सोचती हैं इससे उन्हें दिन भर का समय मिल जाता है।
शीतल मेहरा जो अपने घर पर अपने एक डॉग के साथ लॉक्ड डाउन थी उन्हें उसके लिए एक डेकेयर सेंटर मिल गया है, जिससे वो अपने काम में ध्यान दे पाती है और उन्हें अपने डॉग को घुमाने या खिलाने के लिए बार-बार उठना नहीं पड़ता।
5-हेल्प के लिए संकोच न करें।
कॉउंसलर निशा शेट्टी कहती है कि सपोर्ट या हेल्प मांगने में कोई बुराई नहीं है, भले ही फिर वो ऑफिस में किसी साथ में काम करने वाले से हो या घर पर किसी सदस्य से, क्योंकि कई बार वो लोग हमें बेहतर सुझाव या टिप्स दे सकते हैं, जिससे हमारी बहुत मदद हो सकती है।
आपको चुप रहकर सब झेलने की ज़रूरत नहीं है। मुंबई के एक स्कूल में फूल टाइम कॉउंसलर के रूप में काम करने वाली निशा बिलकुल साफ़ है, कि उनकी हैल्थ उनके लिए सबसे ज़रूरी है। वो कहती हैं "आपको थोड़ा कड़क होना होगा और अपनी ऑफिस में कुछ बाउंडरीज सेट करनी होंगी। ये ही होम टीम पर भी लागु होता है। चाहे वो पति हो, बच्चे हों या फ्लैटमेट्स। अपने काम के समय को लेकर क्लियर रहें और ध्यान रहे कि आप खुद को पूरा टाइम दें।"
आपको चुप रहकर सब झेलने की ज़रूरत नहीं है। मुंबई के एक स्कूल में फूल टाइम कॉउंसलर के रूप में काम करने वाली निशा बिलकुल साफ़ है, कि उनकी हैल्थ उनके लिए सबसे ज़रूरी है। वो कहती हैं "आपको थोड़ा कड़क होना होगा और अपनी ऑफिस में कुछ बाउंडरीज सेट करनी होंगी। ये ही होम टीम पर भी लागु होता है। चाहे वो पति हो, बच्चे हों या फ्लैटमेट्स। अपने काम के समय को लेकर क्लियर रहें और ध्यान रहे कि आप खुद को पूरा टाइम दें।"



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें